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ramayan 3.37.13: 'श्री राम धर्म के साक्षात स्वरूप हैं। वे संत और सत्यपुरुष हैं। जिस प्रकार इन्द्र समस्त देवताओं के अधिपति हैं, उसी प्रकार श्री राम भी सम्पूर्ण जगत के राजा हैं।'   |   ramayan सर्ग 3.37: मारीच का रावण को श्रीरामचन्द्रजी के गुण और प्रभाव बताकर सीताहरण के उद्योग से रोकना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 37: मारीच का रावण को श्रीरामचन्द्रजी के गुण और प्रभाव बताकर सीताहरण के उद्योग से रोकना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.37.13 
रामो विग्रहवान् धर्म: साधु: सत्यपराक्रम:।
राजा सर्वस्य लोकस्य देवानामिव वासव:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'श्री राम धर्म के साक्षात स्वरूप हैं। वे संत और सत्यपुरुष हैं। जिस प्रकार इन्द्र समस्त देवताओं के अधिपति हैं, उसी प्रकार श्री राम भी सम्पूर्ण जगत के राजा हैं।'
 
'Shri Ram is the embodiment of religion. He is a saint and a man of truth. Just as Indra is the ruler of all the gods, similarly Shri Ram is also the king of the entire world. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)