vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 37: मारीच का रावण को श्रीरामचन्द्रजी के गुण और प्रभाव बताकर सीताहरण के उद्योग से रोकना
»
श्लोक 1
श्लोक
3.37.1
तच्छ्रुत्वा राक्षसेन्द्रस्य वाक्यं वाक्यविशारद:।
प्रत्युवाच महातेजा मारीचो राक्षसेश्वरम्॥ १॥
अनुवाद
राक्षसराज रावण के उपर्युक्त वचन सुनकर बातचीत में कुशल मारीच ने उसे इस प्रकार उत्तर दिया-॥1॥
Having heard the above words of the demon king Ravana, Maricha, who was skilled in conversation, replied to him thus -॥ 1॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd