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ramayan 3.37.1: राक्षसराज रावण के उपर्युक्त वचन सुनकर बातचीत में कुशल मारीच ने उसे इस प्रकार उत्तर दिया-॥1॥   |   ramayan सर्ग 3.37: मारीच का रावण को श्रीरामचन्द्रजी के गुण और प्रभाव बताकर सीताहरण के उद्योग से रोकना   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.37.1 
तच्छ्रुत्वा राक्षसेन्द्रस्य वाक्यं वाक्यविशारद:।
प्रत्युवाच महातेजा मारीचो राक्षसेश्वरम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण के उपर्युक्त वचन सुनकर बातचीत में कुशल मारीच ने उसे इस प्रकार उत्तर दिया-॥1॥
 
Having heard the above words of the demon king Ravana, Maricha, who was skilled in conversation, replied to him thus -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)