श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 36: रावण का मारीच से श्रीराम के अपराध बताकर उनकी पत्नी सीता के अपहरण में सहायता के लिये कहना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.36.19 
त्वां तु नि:संशयं सीता दृष्ट्वा तु मृगरूपिणम्।
गृह्यतामिति भर्तारं लक्ष्मणं चाभिधास्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हें विचित्र मृग के रूप में देखकर सीता अवश्य ही अपने पति राम और लक्ष्मण से तुम्हें पकड़वाने के लिए कहेंगी।॥19॥
 
'Seeing you in the form of a strange deer, Sita will certainly ask her husband Rama and Lakshmana to capture you.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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