श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 36: रावण का मारीच से श्रीराम के अपराध बताकर उनकी पत्नी सीता के अपहरण में सहायता के लिये कहना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.36.16 
वीर्ये युद्धे च दर्पे च न ह्यस्ति सदृशस्तव।
उपायतो महान् शूरो महामायाविशारद:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वीरता, युद्ध और वीरता में आपके समान कोई नहीं है। आप नाना प्रकार के उपाय बताने में बड़े वीर हैं। महान माया का प्रयोग करने में भी आप कुशल हैं॥16॥
 
‘There is no one like you in valour, in battle and in heroic pride. You are very brave in suggesting various solutions. You are also very skilled in using great illusions.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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