| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 33: शूर्पणखा का रावण को फटकारना » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 3.33.9  | येषां चाराश्च कोशश्च नयश्च जयतां वर।
अस्वाधीना नरेन्द्राणां प्राकृतैस्ते जनै: समा:॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | हे विजयवीरों में श्रेष्ठ रात्रिराज! जिनके गुप्तचर, कोष और नीति वश में नहीं हैं, वे राजा साधारण मनुष्यों के समान ही हैं॥9॥ | | | | 'O king of the night, who is the best among the victorious heroes! Those kings who do not have their spies, treasury and policy under their control are just like ordinary people.॥ 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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