श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 33: शूर्पणखा का रावण को फटकारना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.33.6 
ये न रक्षन्ति विषयमस्वाधीनं नराधिपा:।
ते न वृद्धॺा प्रकाशन्ते गिरय: सागरे यथा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जो राजा अपनी ही उपेक्षा से दूसरों के हाथ में गए हुए राज्य क्षेत्र की रक्षा नहीं करते और उसे पुनः अपने अधीन नहीं लाते, वे समुद्र में डूबे हुए पर्वतों के समान स्वयं उठकर शोभायमान नहीं होते॥6॥
 
Those kings who do not protect the region of their kingdom which has gone into the hands of others due to their own negligence and do not bring it back under their control, they do not shine by their own rise like mountains submerged in the ocean. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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