| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 33: शूर्पणखा का रावण को फटकारना » श्लोक 5 |
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| | | | श्लोक 3.33.5  | अयुक्तचारं दुर्दर्शमस्वाधीनं नराधिपम्।
वर्जयन्ति नरा दूरान्नदीपङ्कमिव द्विपा:॥ ५॥ | | | | | | अनुवाद | | जो राजा राज्य की देखभाल के लिए गुप्तचरों को नियुक्त नहीं करता, जिसका प्रजा से मिलना कठिन हो जाता है और स्त्री आदि भोगों में आसक्ति के कारण जिसकी स्वतन्त्रता नष्ट हो जाती है, ऐसा राजा प्रजा द्वारा उसी प्रकार त्याग दिया जाता है, जैसे हाथी नदी के कीचड़ से दूर रहते हैं॥5॥ | | | | 'A king who does not appoint spies to look after the kingdom, whose meeting with the subjects becomes difficult and whose independence is lost due to attachment to the pleasures of women etc., such a king is shunned by the subjects. Just like elephants stay away from the mud of the river.॥ 5॥ | | ✨ ai-generated | | |
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