श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 33: शूर्पणखा का रावण को फटकारना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.33.23 
परावमन्ता विषयेषु सङ्गवान्
न देशकालप्रविभागतत्त्ववित्।
अयुक्तबुद्धिर्गुणदोषनिश्चये
विपन्नराज्यो न चिराद् विपत्स्यसे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'तुम दूसरों का अनादर करने वाले, सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले और समय-स्थान का सही भेद न जानने वाले व्यक्ति हो। तुमने कभी भी अपनी बुद्धि का प्रयोग गुण-दोष के बीच विचार करने और निर्णय करने के लिए नहीं किया। इसलिए तुम्हारा राज्य शीघ्र ही नष्ट हो जाएगा और तुम स्वयं भी घोर संकट में पड़ जाओगे।'
 
'You are a person who disrespects others, is engrossed in worldly pleasures and does not know the true distinction between time and space. You have never used your intellect to think and decide between the merits and demerits. Therefore, your kingdom will soon be destroyed and you yourself will fall into great trouble.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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