श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 33: शूर्पणखा का रावण को फटकारना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.33.16 
अतिमानिनमग्राह्यमात्मसम्भावितं नरम्।
क्रोधनं व्यसने हन्ति स्वजनोऽपि नराधिपम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'जो मनुष्य अत्यंत अभिमानी, दत्तक ग्रहण के अयोग्य, अपने को बहुत बड़ा समझता है और क्रोधी है, ऐसा मनुष्य या राजा संकट के समय अपने ही सगे-संबंधियों के द्वारा मारा जाता है ॥16॥
 
'A person who is extremely arrogant, unworthy of being adopted, considers himself to be very great and is short-tempered, such a person or a king is killed even by his own relatives in times of crisis. ॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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