श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 33: शूर्पणखा का रावण को फटकारना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.33.14 
त्वं तु लुब्ध: प्रमत्तश्च पराधीनश्च राक्षस।
विषये स्वे समुत्पन्नं यद् भयं नावबुध्यसे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'राक्षस! तू लोभ और प्रमाद के कारण दूसरों के अधीन हो रहा है; इसलिए अपने राज्य में जो संकट उत्पन्न हुआ है, उसे तू नहीं जानता॥ 14॥
 
'Demon! You are becoming subservient to others because of greed and negligence; therefore, you are unaware of the danger that has arisen in your own kingdom.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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