| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 33: शूर्पणखा का रावण को फटकारना » श्लोक 11 |
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| | | | श्लोक 3.33.11  | अयुक्तचारं मन्ये त्वां प्राकृतै: सचिवैर्युत:।
स्वजनं च जनस्थानं निहतं नावबुध्यसे॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | मैं समझता हूँ कि तुम मूर्ख मन्त्रियों से घिरे हुए हो, इसीलिए तुमने अपने राज्य में गुप्तचर नहीं भेजे हैं। तुम्हारे सम्बन्धी मारे गए और जनस्थान उजड़ गया, फिर भी तुम्हें इसका पता नहीं चला॥ 11॥ | | | | ‘I think you are surrounded by foolish ministers, that is why you have not deployed spies in your kingdom. Your relatives were killed and Janasthan was devastated, yet you have not found out about it.॥ 11॥ | | ✨ ai-generated | | |
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