| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 33: शूर्पणखा का रावण को फटकारना » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 3.33.10  | यस्मात् पश्यन्ति दूरस्थान् सर्वानर्थान् नराधिपा:।
चारेण तस्मादुच्यन्ते राजानो दीर्घचक्षुष:॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘राजा गुप्तचरों की सहायता से दूर-दूर के समस्त कार्यों पर दृष्टि रखते हैं, इसीलिए वे दूरदर्शी या दूरदर्शी कहलाते हैं ॥10॥ | | | | ‘With the help of spies, kings keep an eye on all the affairs of distant places, that is why they are called far-sighted or far-sighted.॥ 10॥ | | ✨ ai-generated | | |
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