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श्लोक 3.30.4  |
यत् त्वयोक्तं विनष्टानामिदमश्रुप्रमार्जनम्।
राक्षसानां करोमीति मिथ्या तदपि ते वच:॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| 'तुमने कहा था कि मैं तुम्हें मारकर तुम्हारे द्वारा मारे गए राक्षसों के आँसू पोंछ दूँगा, परन्तु वह भी झूठ निकला। ॥4॥ |
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| 'You had said that after killing you I will wipe the tears of the demons killed by you, but that too has turned out to be a lie. ॥ 4॥ |
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