श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 30: श्रीराम के व्यङ्ग करने पर खर का उनके ऊपर साल वृक्ष का प्रहार करना, श्रीराम का तेजस्वी बाण से खर को मार गिराना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.30.28 
स वृत्र इव वज्रेण फेनेन नमुचिर्यथा।
बलो वेन्द्राशनिहतो निपपात हत: खर:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जैसे वृत्रासुर वज्र से, नमुचि धनुष से और बलासुर इन्द्र के द्वारा मारा गया था, उसी प्रकार श्री रामजी के बाण से घायल होकर खर गिर पड़ा॥28॥
 
Just as Vritraasura was killed by the thunderbolt, Namuchi by the bow and Balaasura by the demon Indra, similarly Khar fell down after being struck by that arrow of Sri Rama.॥28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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