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कालपाशपरिक्षिप्ता भवन्ति पुरुषा हि ये।
कार्याकार्यं न जानन्ति ते निरस्तषडिन्द्रिया:॥ १५॥
अनुवाद
जो लोग मृत्यु के जाल में फँस जाते हैं, उनकी छहों इन्द्रियाँ बेकार हो जाती हैं; इसलिए उन्हें उचित-अनुचित का ज्ञान नहीं रहता।॥15॥
‘Those who are caught in the trap of death, their six senses become useless; therefore they lose the knowledge of what is right and what is wrong.’॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥