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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 29: श्रीराम का खर को फटकारना तथा खर का भी उन्हें कठोर उत्तर देकर उनके ऊपर गदा का प्रहार करना और श्रीराम द्वारा उस गदा का खण्डन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.29.25 
इत्युक्त्वा परमक्रुद्ध: स गदां परमाङ्गदाम्।
खरश्चिक्षेप रामाय प्रदीप्तामशनिं यथा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर खरने ने अत्यन्त क्रोध में भरकर सुन्दर अँगूठी (कंगन) धारण की और प्रज्वलित वज्र के समान भयंकर गदा श्री रामचन्द्रजी पर चलाई॥25॥
 
Saying this, Kharne, filled with extreme anger, adorned with a beautiful ring (bracelet) and launched a fierce mace like a flaming thunderbolt at Shri Ramchandraji. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)