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ramayan 3.29.23: 'यद्यपि मैं तुम्हारे विषय में जितना चाहूँ कह सकता हूँ, तथापि इस समय कुछ नहीं कहूँगा; क्योंकि सूर्यदेव अस्त हो रहे हैं, अतः युद्ध में बाधा पड़ेगी॥ 23॥   |   ramayan सर्ग 3.29: श्रीराम का खर को फटकारना तथा खर का भी उन्हें कठोर उत्तर देकर उनके ऊपर गदा का प्रहार करना और श्रीराम द्वारा उस गदा का खण्डन   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 29: श्रीराम का खर को फटकारना तथा खर का भी उन्हें कठोर उत्तर देकर उनके ऊपर गदा का प्रहार करना और श्रीराम द्वारा उस गदा का खण्डन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.29.23 
कामं बह्वपि वक्तव्यं त्वयि वक्ष्यामि न त्वहम्।
अस्तं प्राप्नोति सविता युद्धविघ्नस्ततो भवेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'यद्यपि मैं तुम्हारे विषय में जितना चाहूँ कह सकता हूँ, तथापि इस समय कुछ नहीं कहूँगा; क्योंकि सूर्यदेव अस्त हो रहे हैं, अतः युद्ध में बाधा पड़ेगी॥ 23॥
 
'Although I can say as much as I want about you, yet I will not say anything at this time; because the Sun God is setting, therefore the war will be interrupted.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)