श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 29: श्रीराम का खर को फटकारना तथा खर का भी उन्हें कठोर उत्तर देकर उनके ऊपर गदा का प्रहार करना और श्रीराम द्वारा उस गदा का खण्डन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.29.16 
प्राकृतान् राक्षसान् हत्वा युद्धे दशरथात्मज।
आत्मना कथमात्मानमप्रशस्यं प्रशंससि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘दशरथकुमार! युद्ध में साधारण राक्षसों का वध करके तुम अपनी इतनी प्रशंसा कैसे कर सकते हो? तुम प्रशंसा के योग्य बिल्कुल नहीं हो॥16॥
 
‘Dasarathakumar! How can you praise yourself so much after killing ordinary demons in the war? You are not worthy of praise at all.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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