|
| |
| |
श्लोक 3.29.14  |
प्रहरस्व यथाकामं कुरु यत्नं कुलाधम।
अद्य ते पातयिष्यामि शिरस्तालफलं यथा॥ १४॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| कुलाधम! तुम मुझ पर जितना चाहो आक्रमण करो। मुझे जितना परास्त करने का प्रयत्न कर सको, पर आज मैं तुम्हारा सिर ताड़ के फल के समान अवश्य काट डालूँगा।॥14॥ |
| |
| ‘Kulaadham! Attack me as much as you want. Try to defeat me as much as you can, but today I will surely chop off your head like a fruit of a palm tree.’॥ 14॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|