| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 28: खर के साथ श्रीराम का घोर युद्ध » श्लोक 27 |
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| | | | श्लोक 3.28.27  | शिरस्येकेन बाणेन द्वाभ्यां बाह्वोरथार्पयत् ।
त्रिभिश्चन्द्रार्धवक्त्रैश्च वक्षस्यभिजघान ह॥ २७॥ | | | | | | अनुवाद | | उसने उसके सिर पर एक, भुजाओं पर दो और छाती में तीन अर्द्धचन्द्राकार बाण मारे, जिससे वह गहरे घाव कर गया॥ 27॥ | | | | He struck him with one arrow on his head, two on his arms and three crescent-shaped arrows in his chest, causing deep wounds.॥ 27॥ | | ✨ ai-generated | | |
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