श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 28: खर के साथ श्रीराम का घोर युद्ध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.28.23 
स दर्शनीयो बहुधा विच्छिन्न: काञ्चनो ध्वज:।
जगाम धरणीं सूर्यो देवतानामिवाज्ञया॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वह शोभायमान स्वर्ण ध्वजा अनेक टुकड़ों में कटकर भूमि पर गिर पड़ी, मानो देवताओं की आज्ञा से सूर्यदेव पृथ्वी पर अवतरित हुए हों।
 
That spectacular golden flag got cut into many pieces and fell on the ground, as if the Sun God had descended on earth by the order of the gods. 23.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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