| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 3: अरण्य काण्ड » सर्ग 28: खर के साथ श्रीराम का घोर युद्ध » श्लोक 20 |
|
| | | | श्लोक 3.28.20  | ततो गम्भीरनिर्ह्रादं राम: शत्रुनिबर्हण:।
चकारान्ताय स रिपो: सज्यमन्यन्महद्धनु:॥ २०॥ | | | | | | अनुवाद | | तब शत्रुओं का नाश करने वाले भगवान श्री राम ने अपने शत्रु का नाश करने के लिए गूँजती हुई ध्वनि के साथ दो विशाल धनुषों पर प्रत्यंचा चढ़ाई। | | | | Then Lord Sri Rama, the destroyer of enemies, strung two huge bows with a resounding sound, to destroy His adversary. | | ✨ ai-generated | | |
|
|