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ramayan 3.26.7-9h: तब पराक्रमी श्री राम ने अत्यन्त कुपित होकर युद्धस्थल में क्षुर नामक बाण से दूषण का विशाल धनुष काट डाला, चार तीखे बाणों से उसके चारों घोड़ों को मार डाला, अर्धचन्द्राकार बाण से सारथि का सिर काट डाला तथा तीन बाणों से उस राक्षस की छाती में घाव कर दिया।   |   ramayan सर्ग 3.26: श्रीराम के द्वारा दूषण सहित चौदह सहस्र राक्षसों का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम के द्वारा दूषण सहित चौदह सहस्र राक्षसों का वध  »  श्लोक 7-9h
 
 
श्लोक  3.26.7-9h 
ततो राम: सुसंक्रुद्ध: क्षुरेणास्य महद् धनु:॥ ७॥
चिच्छेद समरे वीरश्चर्तुभिश्चतुरो हयान्।
हत्वा चाश्वान् शरैस्तीक्ष्णैरर्धचन्द्रेण सारथे:॥ ८॥
शिरो जहार तद्रक्षस्त्रिभिर्विव्याध वक्षसि।
 
 
अनुवाद
तब पराक्रमी श्री राम ने अत्यन्त कुपित होकर युद्धस्थल में क्षुर नामक बाण से दूषण का विशाल धनुष काट डाला, चार तीखे बाणों से उसके चारों घोड़ों को मार डाला, अर्धचन्द्राकार बाण से सारथि का सिर काट डाला तथा तीन बाणों से उस राक्षस की छाती में घाव कर दिया।
 
Then, the valiant Sri Rama became very enraged and cut off Dushan's huge bow in the battleground with an arrow called Kshur, killed all his four horses with four sharp arrows, and beheaded the charioteer with a half-moon shaped arrow, and wounded the demon in the chest with three arrows. 7-8 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)