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श्री रघुनन्दन ने महाकपाल का मस्तक और कपाल उड़ा दिया। प्रमाथी को असंख्य बाणों से मथ डाला गया और स्थूलक्ष के मोटे नेत्र विचारों से भर गए।
Shri Raghunandan blew off Mahakapal's head and skull. Pramathi was churned with innumerable sets of arrows and the thick eyes of Sthulaksha were filled with thoughts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥