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ramayan 3.26.11: उसके चारों ओर नुकीले लोहे की कीलें लगी थीं। वह शत्रुओं की चर्बी से ढका हुआ था। उसका स्पर्श हीरे और वज्र के समान कठोर और असहनीय था। वह शत्रुओं के नगर के द्वार तोड़ने में सक्षम था।   |   ramayan सर्ग 3.26: श्रीराम के द्वारा दूषण सहित चौदह सहस्र राक्षसों का वध   ।   ramayan काण्ड 3: अरण्य काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम के द्वारा दूषण सहित चौदह सहस्र राक्षसों का वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.26.11 
आयसै: शङ्कुभिस्तीक्ष्णै: कीर्णं परवसोक्षितम्।
वज्राशनिसमस्पर्शं परगोपुरदारणम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उसके चारों ओर नुकीले लोहे की कीलें लगी थीं। वह शत्रुओं की चर्बी से ढका हुआ था। उसका स्पर्श हीरे और वज्र के समान कठोर और असहनीय था। वह शत्रुओं के नगर के द्वार तोड़ने में सक्षम था।
 
It had sharp iron nails all around it. It was covered with the fat of the enemies. Its touch was as hard and unbearable as a diamond and a thunderbolt. It was capable of breaking the city gates of the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)