श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का तात्कालिक शकुनों द्वारा राक्षसों के विनाश और अपनी विजय की सम्भावना करके सीता सहित लक्ष्मण को पर्वत की गुफा में भेजना और युद्ध के लिये उद्यत होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.24.7 
सम्प्रहारस्तु सुमहान् भविष्यति न संशय:।
अयमाख्याति मे बाहु: स्फुरमाणो मुहुर्मुहु:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'मेरी यह दाहिनी भुजा बार-बार फड़क रही है और यह इस बात का संकेत है कि थोड़े ही समय में बहुत बड़ा युद्ध होने वाला है; इसमें संशय नहीं है ॥7॥
 
'This right arm of mine is twitching repeatedly and this is an indication that a huge war will take place in a short while; there is no doubt about it. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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