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श्लोक 3.21.5  |
अनाथवद् विलपसि किं नु नाथे मयि स्थिते।
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ मा मैवं वैक्लव्यं त्यज्यतामिति॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| मेरे जैसे रक्षक के होते हुए भी तुम अनाथ की तरह क्यों रो रहे हो? उठो! उठो! इस तरह मत रोओ। अपनी घबराहट छोड़ दो।॥5॥ |
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| ‘Why do you cry like an orphan when you have a guardian like me? Get up! Get up!! Don’t wallow like this. Give up your nervousness.’॥ 5॥ |
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