श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 21: शूर्पणखा का खर के पास आकर उन राक्षसों के वध का समाचार बताना और राम का भय दिखाकर उसे युद्ध के लिये उत्तेजित करना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  3.21.16-17h 
बुद्धॺाहमनुपश्यामि न त्वं रामस्य संयुगे॥ १६॥
स्थातुं प्रतिमुखे शक्त: सबलोऽपि महारणे।
 
 
अनुवाद
मैं बार-बार सोचता हूँ कि यद्यपि तुम महायुद्ध में अत्यन्त बलवान हो, फिर भी राम के सामने टिक न सकोगे॥16 1/2॥
 
‘I think again and again that even though you are very strong in the great war, you will not be able to stand against Rama.॥ 16 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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