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श्लोक 3.21.12  |
विषादनक्राध्युषिते परित्रासोर्मिमालिनि।
किं मां न त्रायसे मग्नां विपुले शोकसागरे॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| मैं उस विशाल शोक सागर में डूब गया हूँ, जहाँ शोक रूपी मगरमच्छ रहते हैं और भय रूपी लहरें उठती रहती हैं। आप मुझे उस शोक सागर से क्यों नहीं छुड़ाते?॥12॥ |
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| ‘I have drowned in that vast sea of grief, where crocodiles of sorrow reside and waves of fear keep rising. Why don't you rescue me from that sea of grief?॥ 12॥ |
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