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श्लोक 3.2.17  |
पश्य सौम्य नरेन्द्रस्य जनकस्यात्मसम्भवाम्।
मम भार्यां शुभाचारां विराधाङ्के प्रवेशिताम्॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| सौम्य! देख! राजा जनक की पुत्री तथा मेरी धर्मपरायण एवं पतिव्रता पत्नी सीता असहाय होकर विराध के चंगुल में आ गई है॥ 17॥ |
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| 'Soumya! Please look! King Janaka's daughter and my virtuous and faithful wife Sita has come helplessly to the clutches of Viradha.॥ 17॥ |
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