श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 19: शूर्पणखा के मुख से उसकी दुर्दशा का वृत्तान्त सुनकर क्रोध में भरे हए खर का श्रीराम आदि के वध के लिये चौदह राक्षसों को भेजना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.19.24 
मनोरथोऽयमिष्टोऽस्या भगिन्या मम राक्षसा:।
शीघ्रं सम्पाद्यतां गत्वा तौ प्रमथ्य स्वतेजसा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'हे दैत्यों! यह मेरी बहन की प्रिय इच्छा है। तुम वहाँ जाओ और अपनी शक्ति से उन दोनों मनुष्यों को मार डालो और मेरी बहन की इच्छा शीघ्र पूरी करो।'
 
'O demons! This is my sister's favourite wish. You go there and kill those two men with your power and fulfill my sister's wish quickly.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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