श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 17: श्रीराम के आश्रम में शूर्पणखा का आना, उनका परिचय जानना और अपना परिचय देकर उनसे अपने को भार्या के रूप में ग्रहण करने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.17.15 
आसीद् दशरथो नाम राजा त्रिदशविक्रम:।
तस्याहमग्रज: पुत्रो रामो नाम जनै: श्रुत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘देवि! दशरथ नाम के एक प्रसिद्ध सम्राट हुए हैं, जो देवताओं के समान पराक्रमी थे। मैं उनका ज्येष्ठ पुत्र हूँ और लोगों में राम नाम से प्रसिद्ध हूँ।॥15॥
 
‘Devi! There is a famous emperor named Dasharath who was as powerful as the gods. I am his eldest son and am famous among the people by the name of Ram.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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