श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 17: श्रीराम के आश्रम में शूर्पणखा का आना, उनका परिचय जानना और अपना परिचय देकर उनसे अपने को भार्या के रूप में ग्रहण करने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.17.11 
तरुणं दारुणा वृद्धा दक्षिणं वामभाषिणी।
न्यायवृत्तं सुदुर्वृत्ता प्रियमप्रियदर्शना॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वे सौम्य और चिरयुवा दिखते थे, किन्तु वह निशाचर स्त्री क्रूर और सहस्त्र वर्ष की वृद्धा थी। वे सरलभाषी और उदार थे, किन्तु उनके वचन छल से भरे थे। वे न्यायपूर्ण और सदाचारी थे, जबकि वह स्त्री अत्यंत दुष्ट थी। श्री राम मनोहर दिखते थे, और शूर्पणखा को देखकर घृणा उत्पन्न होती थी॥ 11॥
 
He looked gentle and ever young, but that night-woman was cruel and thousands of years old. He was simple-spoken and generous, but his words were full of deceit. He followed just and virtuous conduct, while she was extremely wicked. Shri Ram looked lovely, and the sight of Shurpanakha aroused hatred.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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