vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 3: अरण्य काण्ड
»
सर्ग 16: लक्ष्मण के द्वारा हेमन्त ऋतु का वर्णन और भरत की प्रशंसा तथा श्रीराम का उन दोनों के साथ गोदावरी नदी में स्नान
»
श्लोक 27
श्लोक
3.16.27
अस्मिंस्तु पुरुषव्याघ्र काले दु:खसमन्वित:।
तपश्चरति धर्मात्मा त्वद्भक्त्या भरत: पुरे॥ २७॥
अनुवाद
हे राम! इस समय धर्मात्मा भरत आपके लिए अत्यन्त दुःखी हैं और आपकी भक्ति करते हुए नगर में तपस्या कर रहे हैं॥ 27॥
'Lord Rama! At this time, the virtuous Bharata is very sad for you and is performing penance in the city while having devotion towards you.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×