श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 14: पञ्चवटी के मार्ग में जटायु का मिलना और श्रीराम को अपना विस्तृत परिचय देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.14.20 
चक्रवाकांश्च भद्रं ते विजज्ञे सापि भामिनी।
शुकी नतां विजज्ञे तु नतायां विनता सुता॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! आपका कल्याण हो, उसी भामिनी धृतराष्ट्री ने चक्रवाक नामक पक्षियों को भी जन्म दिया था। ताम्र की सबसे छोटी पुत्री शुकी ने नट नामक कन्या को जन्म दिया। नट ने विनता नामक कन्या को जन्म दिया।
 
‘Shri Ram! May you be blessed, the same Bhaamini Dhritarashtri also gave birth to the birds called Chakravak. Tamra's youngest daughter Shuki gave birth to a girl named Nata. Nata gave birth to a daughter named Vinata.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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