श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 3: अरण्य काण्ड  »  सर्ग 13: महर्षि अगस्त्य का सीता की प्रशंसा करना, श्रीराम के पूछने पर उन्हें पञ्चवटी में आश्रम बनाकर रहने का आदेश देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.13.19 
प्राज्यमूलफलैश्चैव नानाद्विजगणैर्युत:।
विविक्तश्च महाबाहो पुण्यो रम्यस्तथैव च॥ १९॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! वह स्थान प्रचुर मात्रा में फल-मूल से युक्त है, नाना प्रकार के पक्षियों से सेवित है, एकान्त, पवित्र और सुन्दर है॥19॥
 
‘Mahabaho! That place is blessed with abundant fruits and roots, is served by various birds, is secluded, sacred and beautiful.॥ 19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd