Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.99.36: 'हाय! समस्त सुखों को भोगने के योग्य श्री रामजी मेरे कारण इस दुःख में पड़े हैं। हाय! मैं कितना निर्दयी हूँ? धिक्कार है मेरे इस जीवन को, जिसकी लोगों ने निंदा की है!'॥ 36॥ | ramayan सर्ग 2.99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'हाय! समस्त सुखों को भोगने के योग्य श्री रामजी मेरे कारण इस दुःख में पड़े हैं। हाय! मैं कितना निर्दयी हूँ? धिक्कार है मेरे इस जीवन को, जिसकी लोगों ने निंदा की है!'॥ 36॥
'Alas! Sri Rama, who is worthy of enjoying all happiness, has fallen into such misery because of me. Oh! How cruel am I? Shame on this life of mine which is condemned by the people!'॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥