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ramayan 2.99.35: जिनके शरीर के अंगों की सेवा बहुमूल्य चन्दन से की गई थी, मेरे पूज्य भाई के शरीर की सेवा चन्दन से कैसे की जा रही है? 35॥   |   ramayan सर्ग 2.99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.99.35 
चन्दनेन महार्हेण यस्याङ्गमुपसेवितम्।
मलेन तस्याङ्गमिदं कथमार्यस्य सेव्यते॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जिनके शरीर के अंगों की सेवा बहुमूल्य चन्दन से की गई थी, मेरे पूज्य भाई के शरीर की सेवा चन्दन से कैसे की जा रही है? 35॥
 
'Whose body parts were served with precious sandalwood, how is this body of my respected brother being served with sandalwood? 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)