श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.99.3 
सुमन्त्रस्त्वपि शत्रुघ्नमदूरादन्वपद्यत।
रामदर्शनजस्तर्षो भरतस्येव तस्य च॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सुमन्त्र भी शत्रुघ्न के पीछे-पीछे आ रहे थे। भरत की भाँति उन्हें भी श्री रामचन्द्रजी के दर्शन की तीव्र इच्छा हो रही थी॥3॥
 
Sumantra was also following close to Shatrughan. Like Bharat, he also had a strong desire to see Shri Ramchandraji. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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