Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.99.21: वहाँ सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी और भयंकर अनेक बाणों से तरकस भरे हुए थे। वह पत्तों से युक्त उद्यान उन बाणों से उसी प्रकार सुशोभित हो रहा था, जैसे भोगवती पुरी चमकीले मुख वाले सर्पों से सुशोभित है। 21॥ | ramayan सर्ग 2.99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ सूर्य की किरणों के समान तेजस्वी और भयंकर अनेक बाणों से तरकस भरे हुए थे। वह पत्तों से युक्त उद्यान उन बाणों से उसी प्रकार सुशोभित हो रहा था, जैसे भोगवती पुरी चमकीले मुख वाले सर्पों से सुशोभित है। 21॥
There the quivers were filled with many arrows, which were as bright and fierce as the rays of the sun. That leafy garden was adorned with those arrows in the same way as Bhogwati Puri is adorned with bright headed snakes. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥