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ramayan 2.99.19: वह साल, ताल और अश्वकर्ण वृक्षों के अनेक पत्तों से ढका हुआ था, इसलिए वह एक लम्बी और चौड़ी वेदी के समान प्रतीत हो रहा था, जिस पर यज्ञ वेदी के रूप में कोमल कुशा घास बिछाई गई हो।   |   ramayan सर्ग 2.99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.99.19 
सालतालाश्वकर्णानां पर्णैर्बहुभिरावृताम्।
विशालां मृदुभिस्तीर्णां कुशैर्वेदिमिवाध्वरे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह साल, ताल और अश्वकर्ण वृक्षों के अनेक पत्तों से ढका हुआ था, इसलिए वह एक लम्बी और चौड़ी वेदी के समान प्रतीत हो रहा था, जिस पर यज्ञ वेदी के रूप में कोमल कुशा घास बिछाई गई हो।
 
It was covered with many leaves of the saal, tal and ashwakarna trees; hence it looked like a long and wide altar on which soft kusha grass has been spread in a sacrificial altar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)