vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना
»
श्लोक 16
श्लोक
2.99.16
मत्कृते व्यसनं प्राप्तो लोकनाथो महाद्युति:।
सर्वान् कामान् परित्यज्य वने वसति राघव:॥ १६॥
अनुवाद
मेरे कारण जगत के स्वामी महाबली रघुनाथजी महान् क्लेश में पड़कर अपनी समस्त कामनाओं को त्यागकर वन में रहते हैं॥16॥
‘Because of me the mighty Raghunath, the lord of the world, being in great trouble, abandons all his desires and lives in the forest.॥ 16॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas