श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.99.13 
अत्राहं पुरुषव्याघ्रं गुरुसत्कारकारिणम्।
आर्यं द्रक्ष्यामि संहृष्टं महर्षिमिव राघवम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'यहाँ मैं गुरुजनों का आदर करने वाले महापुरुष आर्य रघुनन्दन को देखूँगा, जो सदा प्रसन्न रहने वाले महान् मुनि के समान हैं।' 13॥
 
'Here I will see Arya Raghunandan, the great man who respects his teachers, like a great sage who is always happy.' 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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