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ramayan 2.99.10: ये वस्त्र ऊपर वृक्षों में बँधे हुए दिखाई दे रहे हैं। अतः यह आश्रम की ओर जाने वाला मार्ग हो सकता है, जिसे पहचानने के लिए लक्ष्मण ने यह चिह्न बनाया था, क्योंकि वे जल आदि लाने के लिए विषम समय में बाहर जाना चाहते थे।॥10॥   |   ramayan सर्ग 2.99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.99.10 
उच्चैर्बद्धानि चीराणि लक्ष्मणेन भवेदयम्।
अभिज्ञानकृत: पन्था विकाले गन्तुमिच्छता॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ये वस्त्र ऊपर वृक्षों में बँधे हुए दिखाई दे रहे हैं। अतः यह आश्रम की ओर जाने वाला मार्ग हो सकता है, जिसे पहचानने के लिए लक्ष्मण ने यह चिह्न बनाया था, क्योंकि वे जल आदि लाने के लिए विषम समय में बाहर जाना चाहते थे।॥10॥
 
‘These cloths tied high up in the trees are visible. Therefore, this could be the path leading to the hermitage which Lakshmana made this mark for identification, as he wanted to go out at odd hours to fetch water etc.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)