श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.97.8 
यद् विना भरतं त्वां च शत्रुघ्नं वापि मानद।
भवेन्मम सुखं किंचिद् भस्म तत् कुरुतां शिखी॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे माननीय! यदि मुझे भरत, आपके और शत्रुघ्न के अतिरिक्त कोई अन्य सुख मिले, तो अग्निदेव उसे जलाकर भस्म कर दें॥8॥
 
'O Honorable! If I get any happiness other than Bharata, you and Shatrughna, then may the god of fire burn it to ashes. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)