Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.97.3: 'लक्ष्मण! यदि मैं अपने पिता के सत्य की रक्षा करने की प्रतिज्ञा करके युद्ध में भरत को मारकर उनका राज्य हड़प लूँ, तो संसार में मेरी कितनी निंदा होगी? फिर उस कलंकित राज्य का मैं क्या करूँगा?॥3॥ | ramayan सर्ग 2.97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'लक्ष्मण! यदि मैं अपने पिता के सत्य की रक्षा करने की प्रतिज्ञा करके युद्ध में भरत को मारकर उनका राज्य हड़प लूँ, तो संसार में मेरी कितनी निंदा होगी? फिर उस कलंकित राज्य का मैं क्या करूँगा?॥3॥
'Laxman! If, after taking a vow to protect the truth of my father, I kill Bharata in the war and usurp his kingdom, then how much will I be condemned in the world? Then what will I do with that tainted kingdom?॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥