श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.97.29 
भरतेनाथ संदिष्टा सम्मर्दो न भवेदिति।
समन्तात् तस्य शैलस्य सेना वासमकल्पयत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उधर भरत ने अपनी सेना को आदेश दिया कि ‘हमारे द्वारा यहां किसी को कोई हानि नहीं पहुंचाई जानी चाहिए।’ यह आदेश पाकर सभी सैनिक पर्वत के नीचे ही रुक गए।
 
On the other hand, Bharat ordered his army that 'No one should be harmed by us here.' On receiving this order, all the soldiers stayed below the mountain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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