श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.97.24 
एतौ तौ सम्प्रकाशेते गोत्रवन्तौ मनोरमौ।
वायुवेगसमौ वीरौ जवनौ तुरगोत्तमौ॥ २४॥
 
 
अनुवाद
ये दोनों उत्तम घोड़ों के कुल में उत्पन्न होकर अपने उत्तम घोड़ों के साथ वायु के समान वेगवान, वीर और सुन्दर शोभायमान हो रहे हैं॥ 24॥
 
‘Born in a family of good horses, these two are shining with their excellent horses, swift as the wind, valiant and beautiful.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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