| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 2.97.23  | इमां चाप्येष वैदेहीमत्यन्तसुखसेविनीम्।
पिता मे राघव: श्रीमान् वनादादाय यास्यति॥ २३॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘मेरे पिता, रघुकुल के पुत्र महाराज दशरथ, वन से विदेहराज की पुत्री, परम सुख भोगने वाली सीता को साथ लेकर घर लौटेंगे।॥ 23॥ | | | | 'My father, Maharaja Dasharatha, the son of the Raghukul, will take along with him from the forest, Sita, the daughter of the King of Videhas, who enjoys extreme comforts, and will return home.॥ 23॥ | | ✨ ai-generated | | |
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