श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.97.21 
व्रीडितं लक्ष्मणं दृष्ट्वा राघव: प्रत्युवाच ह।
एष मन्ये महाबाहुरिहास्मान् द्रष्टुमागत:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण को लज्जित देखकर श्री रामजी बोले, 'मैं भी यही मानता हूँ कि ये हमारे महाबाहु पिता ही हमसे मिलने आए हैं।॥ 21॥
 
Seeing Lakshmana embarrassed, Shri Ram replied, 'I too believe that it is our mighty-armed father who has come to meet us.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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