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श्लोक 2.97.21  |
व्रीडितं लक्ष्मणं दृष्ट्वा राघव: प्रत्युवाच ह।
एष मन्ये महाबाहुरिहास्मान् द्रष्टुमागत:॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| लक्ष्मण को लज्जित देखकर श्री रामजी बोले, 'मैं भी यही मानता हूँ कि ये हमारे महाबाहु पिता ही हमसे मिलने आए हैं।॥ 21॥ |
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| Seeing Lakshmana embarrassed, Shri Ram replied, 'I too believe that it is our mighty-armed father who has come to meet us.॥ 21॥ |
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